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भूतिया महल का श्राप 👑👻

भूतिया महल का श्राप 👑👻



बहुत समय पहले की बात है। राजा विक्रमसिंह का विशाल और भव्य महल पूरे राज्य में प्रसिद्ध था। महल की दीवारें सोने और चांदी से जड़ी थीं, और उसकी सुंदरता देखते ही बनती थी। लेकिन इस महल से जुड़ी एक खौफनाक सच्चाई थी—रात के समय वहाँ अजीब घटनाएँ होती थीं।

👻 महल का रहस्य

कहा जाता था कि यह महल श्रापित था। कई वर्षों पहले, एक तांत्रिक ने राजा विक्रमसिंह से बदला लेने के लिए इस महल को श्राप दे दिया था। तभी से, हर पूर्णिमा की रात महल से अजीब चीखें और डरावनी परछाइयाँ दिखती थीं।

राजा ने कई साधु-संतों को बुलाया, पर कोई भी इस रहस्य को सुलझा नहीं पाया। लोग कहते थे कि इस महल में चंदेरी देवी नाम की आत्मा भटकती थी, जो इसी महल की रानी हुआ करती थी।

⚔️ राजकुमार का साहसिक फैसला

राजा के पुत्र राजकुमार अर्जुन ने ठान लिया कि वह इस भूतिया रहस्य को सुलझाकर रहेगा। वह अकेले महल के पुराने खंडहर में गया, जहाँ लोग जाने से डरते थे। महल के अंदर घना अंधेरा था, और अचानक ठंडी हवा बहने लगी।

जैसे ही वह महल के गुप्त तहखाने में पहुँचा, उसे एक सुनहरी पोशाक में एक स्त्री की परछाई दिखी। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।

👑 रानी की आत्मा की कहानी

रानी की आत्मा ने राजकुमार से कहा,
"अर्जुन! मैं इस महल की रानी चंदेरी हूँ। मुझे वर्षों पहले विश्वासघात से मार दिया गया था। मेरी आत्मा तब तक मुक्त नहीं होगी जब तक मेरे हत्यारे का नाम इस महल की दीवारों पर लिखा नहीं जाएगा!"

राजकुमार ने अपने पिता से इस बारे में पूछा, और राजा ने सिर झुका लिया। आखिरकार, सच सामने आया—महल के मंत्री ने लालच में आकर रानी को जहर देकर मार दिया था।

🔥 श्राप का अंत

राजा ने रानी की आत्मा की इच्छा पूरी की। महल की सबसे ऊँची दीवार पर मंत्री का नाम लिख दिया गया, और जैसे ही यह हुआ, तेज़ रोशनी हुई और एक अद्भुत सुगंध फैल गई। रानी की आत्मा मुक्त हो गई और महल से अजीब घटनाएँ हमेशा के लिए बंद हो गईं।

🎭 

महल फिर से वैभवशाली हो गया, और राजकुमार अर्जुन ने न्याय के लिए अपना नाम अमर कर दिया। लेकिन आज भी, पूर्णिमा की रात अगर कोई ध्यान से सुने, तो महल की हवाओं में रानी की हँसी गूँजती है—शायद खुशी की, शायद एक चेतावनी की…

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