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Haunted Station भूतिया स्टेशन



Haunted Station भूतिया स्टेशन 

रात के करीब 12 बजे थे।घना कोहरा पूरे इलाके को ढक चुका था। राजीव, जो एक पत्रकार था, एक दूरदराज़ के गाँव में एक खबर कवर करने के बाद शहर लौट रहा था। उसे आखिरी ट्रेन पकड़नी थी, जो ‘शंकरपुर’ नामक छोटे से स्टेशन से होकर गुजरती थी।

स्टेशन पर अजीब सी खामोशी थी। वहाँ एक पुराना पीला बल्ब टिमटिमा रहा था, और सन्नाटे के बीच केवल झींगुरों की आवाज़ गूँज रही थी। राजीव ने टिकट खिड़की की तरफ देखा, लेकिन वहाँ कोई नहीं था। उसे थोड़ी हैरानी हुई, पर उसने सोचा कि शायद यह कोई सुनसान स्टेशन है।

कुछ देर बाद, उसे एक बुजुर्ग दिखाई दिए, जो लंबा कोट पहने प्लेटफॉर्म के एक कोने में खड़े थे। राजीव उनके पास गया और पूछा,
"बाबा, यहाँ से आखिरी ट्रेन कितने बजे जाती है?"

बुजुर्ग धीमी आवाज़ में बोले,
"बेटा, यहाँ से कोई ट्रेन नहीं गुजरती। यह स्टेशन तो 20 साल पहले बंद हो चुका है।"

राजीव चौंक गया। "लेकिन टाइमटेबल में तो यहाँ ट्रेन का स्टॉप लिखा है!"

बुजुर्ग ने गहरी साँस ली और कहा,
"जिस ट्रेन की तुम बात कर रहे हो, वह आज से 20 साल पहले एक हादसे में पटरी से उतर गई थी और सारे यात्री मारे गए थे… अब वह ट्रेन सिर्फ उन लोगों को ले जाती है, जो इसे सच मानते हैं।"

राजीव हँस पड़ा,
"बाबा, मुझे डराने की कोशिश मत कीजिए, मैं तर्क और सबूतों पर विश्वास करता हूँ।"

लेकिन तभी दूर से ट्रेन की आवाज़ आई। राजीव ने घड़ी देखी—रात के ठीक 12:15 बज रहे थे। ट्रेन आती दिखी, वह तेज़ी से प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ा और उसमें चढ़ गया। ट्रेन में घुसते ही उसे अजीब सा अहसास हुआ। अंदर सवार यात्री अजीब नजरों से उसे घूर रहे थे—उनकी आँखें खाली और बेरंग लग रही थीं।

अचानक उसने खिड़की से बाहर देखा, बुजुर्ग उसे हाथ जोड़कर कुछ संकेत कर रहे थे। तभी राजीव का ध्यान ट्रेन की खिड़की में खुद के प्रतिबिंब पर गया—वह धुंधला था… जैसे वह खुद भी अब इस दुनिया का हिस्सा नहीं रहा!

स्टेशन पर अगली सुबह लोगों को एक अखबार मिला, जिसमें एक पुरानी खबर थी—
"पत्रकार राजीव, 20 साल पहले इसी स्टेशन पर गायब हो गया था, जब वह एक भूतिया ट्रेन में चढ़ गया था।"

... और तब से, हर साल आधी रात को कोई न कोई इस स्टेशन पर इंतजार करता है—और फिर कभी वापस नहीं आता।



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